गुजरात के बहुजन साथियो ने जो घोषना की उनको सून कर मूझे खुशी हुई कि अब वे मृत पशु को नही उठाऐगे । यहां तक कहां कि अगर ब्राहमन गाय को माता मानता है तो गाय का अंतिम संस्कार वोही करे । जीवित गाय माँ है तो मरने बाद भी माँ ही होती है तो शर्म किस बात की ।
उना गांव के चार दलितो को इसलिय पीटा गया कि वो मृत गाय की खाल उतार रहे थे जो उनका खानदानी पैशा है । उनके पुरखे भी यह काम करते आये है । वहां उन लोगो को पीटने वाले RSS और शिव सेना के गुण्डे लोगो के साथ प्रशासन भी था । जिस लाठी से पीठा वो सिर्फ पुलिस के पास ही होती है । इतना ही नही उनके पिता जो माफी मांग रहे थे उनको भी बेरहमी से पीठा गया ।
उना के दलितो की पीटाई का विडियो वायरल हुआ तो सबके होश उङ गये । गुजरात के विभिन्न नगरो मे दलितो ने प्रदर्शन करना शुरु कर दिया । 19 जुलाई 2016 को पुरा गुजरात बन्द कर दिया । गुच्छाये दलितो ने सरकारी बसो आदि की तोङफोङ कर आन्दोलन को उग्र कर दिया । जिससे गुजरात सरकार के साथ केन्द्र सरकार भी कांप गई । बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी ने इस मुद्दे को राज्यसभा मे उठाकर इस अत्याचार की गुँज सङक से संसद तक गुँजा दी । देश के कोने कोने मे विभिन्न अम्बेडकरवादी संगठनो ने आन्दोलन शुरु कर दिया है ।
गुजरात आग की तरह जल रहा था , दुसरी ओर एक और घटना घटित हो गई । इस आग मे घी डालने का काम किया । बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी के उपर राजपुत दयाशंकर के नाम बीजेपी उपी के उपाध्यक्ष ने अपशब्द कहे । इस घटना से उपी सहित संसद, अम्बेडकरवादी संगठन आदि भङक उठे । बाद मे बीजेपी के पद से हठाया , छः साल तक बीजेपी पार्टी से निस्काषित भी किया । लेकिन यह मामला कहां थमने वाला था । 21 जुलाई 2016 की सुबह आठ बजे से लखनऊ मे बहन जी के फौलोवर्स की भीङ जमा होने लगी , देखते ही देखते हजारो की तादाद मे जमा होकर अपना शक्ति प्रदशन किया , यह माहोल देखते ही पुलिश प्रशासन के साथ ही सरकार के होश उङ गये ।
इधर राहुल गांधी उना के पीङित परिवार से मिलने पहुँचे । यह भारत के आजादी के बाद दलित अत्याचार के खिलाप एक क्रांति का आगाज था । डांगावास हत्याकांड, डेल्टा मेघवाल कांड, रोहित वेमुला कांड, उना गुजरात कांड जैसी अनगिनत घटनाये से आज दलित पीङित है । उनमे भारी रोश व्याप्त है । आखिर कब तक हम जुल्म की चक्की मे पिसते रहेंगे ।......
लेखक - हीरा बोस, असाङा
whatsapp 8824370228
heeraram.bose@g mail.com
उना गांव के चार दलितो को इसलिय पीटा गया कि वो मृत गाय की खाल उतार रहे थे जो उनका खानदानी पैशा है । उनके पुरखे भी यह काम करते आये है । वहां उन लोगो को पीटने वाले RSS और शिव सेना के गुण्डे लोगो के साथ प्रशासन भी था । जिस लाठी से पीठा वो सिर्फ पुलिस के पास ही होती है । इतना ही नही उनके पिता जो माफी मांग रहे थे उनको भी बेरहमी से पीठा गया ।
उना के दलितो की पीटाई का विडियो वायरल हुआ तो सबके होश उङ गये । गुजरात के विभिन्न नगरो मे दलितो ने प्रदर्शन करना शुरु कर दिया । 19 जुलाई 2016 को पुरा गुजरात बन्द कर दिया । गुच्छाये दलितो ने सरकारी बसो आदि की तोङफोङ कर आन्दोलन को उग्र कर दिया । जिससे गुजरात सरकार के साथ केन्द्र सरकार भी कांप गई । बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी ने इस मुद्दे को राज्यसभा मे उठाकर इस अत्याचार की गुँज सङक से संसद तक गुँजा दी । देश के कोने कोने मे विभिन्न अम्बेडकरवादी संगठनो ने आन्दोलन शुरु कर दिया है ।
गुजरात आग की तरह जल रहा था , दुसरी ओर एक और घटना घटित हो गई । इस आग मे घी डालने का काम किया । बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी के उपर राजपुत दयाशंकर के नाम बीजेपी उपी के उपाध्यक्ष ने अपशब्द कहे । इस घटना से उपी सहित संसद, अम्बेडकरवादी संगठन आदि भङक उठे । बाद मे बीजेपी के पद से हठाया , छः साल तक बीजेपी पार्टी से निस्काषित भी किया । लेकिन यह मामला कहां थमने वाला था । 21 जुलाई 2016 की सुबह आठ बजे से लखनऊ मे बहन जी के फौलोवर्स की भीङ जमा होने लगी , देखते ही देखते हजारो की तादाद मे जमा होकर अपना शक्ति प्रदशन किया , यह माहोल देखते ही पुलिश प्रशासन के साथ ही सरकार के होश उङ गये ।
इधर राहुल गांधी उना के पीङित परिवार से मिलने पहुँचे । यह भारत के आजादी के बाद दलित अत्याचार के खिलाप एक क्रांति का आगाज था । डांगावास हत्याकांड, डेल्टा मेघवाल कांड, रोहित वेमुला कांड, उना गुजरात कांड जैसी अनगिनत घटनाये से आज दलित पीङित है । उनमे भारी रोश व्याप्त है । आखिर कब तक हम जुल्म की चक्की मे पिसते रहेंगे ।......
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